Sanjog
संजोग मेरा एक अहम काव्य संग्रह है, मैंने अपनी कल्पना और व्यक्तित्व व विचारों की झलक संजोग में संजो रखी है, संजोग एक निश्चल वास्तविकता लिए यथार्थ के धरातल पर कुछ अलग अनछुए भावों से अवगत करती है। प्रकृति के बिखरे अनगिनत रंगों की तरह संजोग की हर कविता एक अलग रंग, भाव, सुंदरता, संदेश और अपनी मिट्टी की पहचान लिए हुए है। "अपना यौवन" कविता एक विवश स्त्री की मनोदशा हर किसी को भाव
विहवल कर देगी, जबकि पीले पीले प्यूली के फूल "कविता" हमें अपने गांव और मिट्टी की महक की याद दिलाती है, "पलायन" कविता एक विवश ग्रामीणों की दुख भरी व्यवस्था को दर्शाती है।
"रो मत" कविता में एक साधारण सी दिखने वाली ग्रामीण दुखी स्त्री जो एक आशीर्वाद के लिए दर-दर भटकती है, और संजोग से वह एक बीहड़ वन में आशीर्वाद का पात्र बन जाती है। संजोग में "प्रतिष्ठा" कविता समाज को उनकी व्यवस्था व चाह का संदेश देती है, इसी तरह हर कविता पाठक एवं समाज को ध्यान में रखते हुए लिखी गई है, लेकिन समाज की कुछ बातों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता, संजोग की कविताएं पढ़ने के पश्चात पाठकों के विचार व कल्पना भी कविता की तरह सैर करेंगी, तभी तो संजोग कृति, रचनाएं और भी जीवंत, सजीव, मनोहरी होगी। और जीवन के अनसुने पहलुओं से अवगत कराने के साथ-साथ प्रेरणा एवं पथ प्रदर्शक भी बनेगी हमारी शुभकामनाएं संजोग के साथ सदैव आपके साथ हैं ।
धन्यवाद
Author
Tara Dutt
ISBN
978-93-7406-546-4
Publication House
FanatiXx Publication


























