top of page

Rahon ke Rang
यह काव्य-संग्रह मन की गहन खामोशी से जन्मा है, जहाँ शब्द नहीं बल्कि अनुभूतियाँ बोलती हैं। हर कविता एक दीपक की तरह भीतर के अँधेरों को चुपचाप उजाला देती है। ‘चिंतन-धारा’ पाठक को उसके अंतरलोक की यात्रा पर ले जाती है, जहाँ जीवन की राहें कभी ‘अबूझ पहेली’ बन जाती हैं और कभी रंगों की तरह खिल उठती हैं। रूमानी संवेदना हवा में तैरती है—प्रेम के उस कोमल कंपन-सी, जो बिना बोले बहुत कुछ कह जाती है। अंत में धुँधले रास्तों के बीच भीतर की नन्ही रोशनी दिशा और भरोसा बनती है। यह संग्रह प्रश्नों, रंगों, प्रेम, संवेदना और अंततः विश्वास में स्थिर हो जाने की गहरी अनुभूति है।
Featured This Month
bottom of page
.png)




















