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Mira Bharti
य स्वानुभूत सत्य ैवक िवणिक छिं द िं नेमेरेमन, प्राण और चैतन्य क
आकवर्ित वकया ै। िवणिक गीवतकाओिं नेमेरी अवभव्यक्ति क सरल,
वनमिल और विह्वल बनाया ै।
िवणिक छिं द का म त्व कविता क लय, सौिंदयि और सिीकता प्रदान
करनेमें ै। इन छिं द िं मेंिणों की सिंख्या और रेम वनवश्चत ते ैं,
वजससेअवभव्यिंजना मेंएक विशेर् प्रकार का सिंगीत और सौिंदयिपैदा
ता ै।
विचार और भाि के मुख्य आधार मानि जीिन के सत्य, िेद-उपवनर्द्
की प्रेरणा, वशिण, अन्य समसामवयक विर्य और आध्याक्तत्मक जीिन
शैली सेजुडे ैं।
‘िवणिक गीवतकायें, भाग 1’-आपके समि ै, कृ पया इसेआशीिािद
प्रदान करेंगे! और,अपनेविचार इस ई-मेल आई डी पर देकर मुझे
अनुगृ ीत करेंगे।
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