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कहानियों का गुलदस्ता- अर्चना गुप्ता

मैं अर्चना गुप्ता, यूँ तो एक शिक्षाविद हूँ पर हृदय से खुद को कवयित्री व लेखिका मानती हूँ। मेरा मानना है कि हम सभी लोग आज एक बहुत ही व्यस्त दिनचर्या में सुलभ सरल ज़िंदगी के मायने कहीं न कहीं भूल रहे है। समाधान तो चाहते है पर कैसे?


एक बेहद आसान रास्ता है जो सदियों से आज़माया हुआ और बहुत ही लोकप्रिय है- कहानियाँ।


कहानियाँ बस एक ऐसा नाम जो हमें अपनी नानी-दादी के साथ परीलोक के चंदा मामा,परियों के पास तो कभी माँ की लोरी में पूरी दुनिया की सैर कराती है और ये कहानियाँ ही तो है जो जीवन की तनाव भरी भाग-दौड़ वाली अस्त-व्यस्त दिनचर्या में मन को असीम सुकून देती है। जीवन की समस्याओं को नए सिरे से सोचने की दिशा व दृष्टि प्रदान करती है।


ये किताब जैसा की नाम से ही प्रतीत होता है कहानियों का एक ऐसा गुलदस्ता है जिसने 'मिस फजिता' नामक कहानी आपको अपने बचपन की शैतानियों की याद हर हाल दिलाएगी ही तो वहीं 'अनछुए पल' बीते पलों के मधुर पलों में खोने को मजबूर करेगी।


अधिकांश लोग मोक्ष चाहते है। इस दुनिया के जंजाल से मुक्ति,पर कहानी 'फिर एक बार चाहिए यही ज़िंदगी बार-बार' सोचने पर विवश करेगी कि यहीं इसी दुनिया में ही तो स्वर्ग-नरक है।


कहानी 'लालता बाई' हमारे घरों में जो लोग हमारे जीवन को आसान व आरामदायक बनाने में सहायक होते है, क्या हम उनके लिए कुछ करते है, यदि हाँ, तो ये कहानी आपको नयी दिशा दिखाएगी।


ये किताब हमें रोज़मर्रा की हताशा, दुख-दर्द, आशा-निराशा के भाव से निकाल कर एक नयी ऊर्जा उत्साह व उमंग की राह दिखाती है।




तो बस देर किस बात की! आज ही इन कहानियों को अपने जीवन का एक हिस्सा बना लीजिए।


जो खूब पढ़ते है,

जीवन में आगे बढ़ते है।


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